Wednesday, December 16, 2009

इस हवा में कुछ कमी सी है.............

इस हवा में कुछ कमी सी है
आती है अब भी कई आवाज़े 

पर वो सारी कुछ दबी-दबी सी है  
इस हवा में कुछ कमी सी है .....
आज भी है कई बादल मेरे आस पास 
पर उनके अन्दर नहीं है 
वो बरस पड़ने का बिश्वास
उनके इरादों में कुछ नमी सी है 
इस हवा में कुछ कमी सी है ....
बैठा है हर कोई आज किसी कोने   में  
खोजता हुआ कहीं कुछ .......किसी शुन्य में 
हर किसी की सांसो में एक सिसक सी है
इस हवा में कुछ कमी सी है...

Sunday, December 13, 2009

हमें जागना होगा


हमें जागना होगा….
समय के समंदर को चीरना होगा,
वो जो लहलहा देते हैं खेतो को
उस पसीने को हमे बहाना होगा………..
हमे जागना होगा…………….
कई चिराग बुझे पड़े है
कुछ तो अब तक जले भी नहीं,
उन सब चिरागों को अब
मसाल बनाना होगा…………
हमे जागना होगा……….
अभी शायद रोशन न कर पाए
पूरी तरह से अपने जहाँ को हम,
पर सोचों इन अंधेरो के बारे में
जिसमे घिसट रहे हैं हम.
पोखर तो अब समंदर हुआ
हर बूँद में सिमट रहे है हम
नई राह दीखाने के लिए ….
हमे खुद को जलाना होगा………
हमे जागना होगा……….